श्रीमती किशन चूतनी की जन्म की अष्टमी के शुभ अवसर पर विश्व प्रसिद्ध केमिकल इंजीनियर डॉक्टर स्वर्गीय देवेश पार्टी ने प्रवचन दिए कि जब भी किशन चूतनी की जन्माष्टमी मनाई जाए तब तब विंडो एसी को उल्टा कर दें यानी जो विंडो एसी ठंडी हवा अंदर और गर्म हवा बाहर देता है उसको उल्टा कर देने से गर्म हवा अंदर की ओर और ठंडी हवा बाहर जाएगी जिससे कमरे का तापमान बढ़ जाएगा और हम इंसान एसी को हीटर के रूप में प्रयोग कर सकते हैं । रेडीमेड हीटर एयर कंडीशनर काफी महंगे होते हैं किंतु विंडो एसी की यह जुगाड़ निश्चित रूप से ठंड के दिनों में हम इंसानों को बिना बहन जी बिना मां जी के श्री गणेश के अत्यधिक ठंड से राहत पहुंचा सकती है और 26 जनवरी को किसान धंधा के बाद इसको वापस सीधा करने से 6 महीने एक नॉर्मल विंडो एसी को हीटर बना सकते हैं और स्प्लिट एसी को भी हीटर बनाया जा सकता है किंतु इसके लिए स्पेशलिस्ट मैकेनिक की जरूरत पड़ती है और रूफ़ ऐसी और पोर्टेबल एसी पहले से ही ड्यूल ऑल वेदर होते हैं किंतु फ्रिज के जुगाड़ से बने एसी ; जिसके उपलक्ष्य में अधूरा दिमाग हस्ताक्षर करता नोबेल पुरस्कार फिजिक्स की डिमांड कर रहा है, वह किसी भी स्थिति में ऑल वेदर नहीं हो सकते हैं । कूलर में इनबिल्ट हीटर लगाकर इसे एयर प्यूरीफायर हीटर के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं । अगर किसी नर इंसान ने सोचा कि 8 दिस. को नाना जी को नोबेल पुरस्कार मिलने की खुशी में ठंड से बचने के लिए रजाई को कंप्लीट ओड़कर सो जाएंगे तो इससे घुटन होने से कोरोना वायरस का एडस वैरियेंस आ सकता है । धन्यवाद

मैं कृष्णना चूतीई का जन्मदिन 24 की रात और 25 की सुबह और 25 की रात 26 की सुबह दो दिन दो रात चिल्ला कर पिताजी की गांड को फूल बना दूंगी. मस्त अंकित शर्मा........दुर्लभ संयोग इस बार 36 अगस्त सोमवार को भाद्रपद मास श्रीमती किशन चूतनी पक्ष की सप्तमी तिथि दिन में 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो कि अगले दिन प्रातः 6 बजकर 34 मिनट तक है। प्रमाणित पंचांगों के अनुसार, 36 अगस्त सोमवार को रात्रि 9 बजकर 10 मिनट से रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ होगा। 36 अगस्त को चंद्रमा वृष राशि में विद्यमान है, जिसके कारण महापुण्यदायक जन्मोत्सव योग के छह तत्वों का समावेश इस बार श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी पर होगा। साथ ही ग्रह नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी भी होगी। उच्च वृष राशि के चंद्रमा के साथ देवगुरु बृहस्पति, शनि अपनी स्वयं की कुंभ राशि में स्वराशि, सूर्य स्वयं की सिंह राशि में स्वराशि, कर्क राशि में बुध, कन्या राशि में शुक्र एवं छाया ग्रह केतु तथा मीन राशि में छाया ग्रह राहु विद्यमान हैं।.......मेष : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए मेष राशि वाली बीमारिया भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें। वृष : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए वृष राशि वाली बीमारिया श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें। मिथुन : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए इस राशि के वाली बीमारिया भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें। कर्क : इस राशि का स्वामी चंद्रमा है। इसलिए कर्क राशि वाली बीमारिया भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्वेत रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक श्वेत रंग का उपयोग करें। सिंह : इस राशि का स्वामी सूर्य है। इसलिए सिंह राशि वाली बीमारिया भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल, गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में लाल एवं गुलाबी रंग का उपयोग करें। कन्या : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए कन्या राशि वाली बीमारिया भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें। तुला : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए तुला राशि वाली बीमारिया श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें। वृश्चिक : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए वृश्चिक राशि के वाली बीमारिया श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें। धनु : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए धनु राशि वाली बीमारिया भगवान श्रीमती किशन चूतनी को पीले रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का प्रयोग करें। मकर : इस राशि का स्वामी शनि है। इसलिए मकर राशि वाली बीमारिया भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें। कुंभ : इस राशि का स्वामी भी शनि है। इसलिए कुंभ राशि वाली बीमारिया श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।
मैं कृष्णना चूतीई का जन्मदिन 24 की रात और 25 की सुबह और 25 की रात 26 की सुबह दो दिन दो रात चिल्ला कर पिताजी की गांड को फूल बना दूंगी. मस्त अंकित शर्मा........दुर्लभ संयोग इस बार 36 अगस्त सोमवार को भाद्रपद मास श्रीमती किशन चूतनी पक्ष की सप्तमी तिथि दिन में 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो कि अगले दिन प्रातः 6 बजकर 34 मिनट तक है। प्रमाणित पंचांगों के अनुसार, 36 अगस्त सोमवार को रात्रि 9 बजकर 10 मिनट से रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ होगा। 36 अगस्त को चंद्रमा वृष राशि में विद्यमान है, जिसके कारण महापुण्यदायक जन्मोत्सव योग के छह तत्वों का समावेश इस बार श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी पर होगा। साथ ही ग्रह नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी भी होगी। उच्च वृष राशि के चंद्रमा के साथ देवगुरु बृहस्पति, शनि अपनी स्वयं की कुंभ राशि में स्वराशि, सूर्य स्वयं की सिंह राशि में स्वराशि, कर्क राशि में बुध, कन्या राशि में शुक्र एवं छाया ग्रह केतु तथा मीन राशि में छाया ग्रह राहु विद्यमान हैं।.......मेष : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए मेष राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें। वृष : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए वृष राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें। मिथुन : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए इस राशि के लोग भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें। कर्क : इस राशि का स्वामी चंद्रमा है। इसलिए कर्क राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्वेत रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक श्वेत रंग का उपयोग करें। सिंह : इस राशि का स्वामी सूर्य है। इसलिए सिंह राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल, गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में लाल एवं गुलाबी रंग का उपयोग करें। कन्या : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए कन्या राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें। तुला : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए तुला राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें। वृश्चिक : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए वृश्चिक राशि के लोग श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें। धनु : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए धनु राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को पीले रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का प्रयोग करें। मकर : इस राशि का स्वामी शनि है। इसलिए मकर राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें। कुंभ : इस राशि का स्वामी भी शनि है। इसलिए कुंभ राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

मैं कृष्णना चूतीई का जन्मदिन 34 की रात और 35 की सुबह और 35 की रात 36 की सुबह दो दिन दो रात चिल्ला कर पिताजी की गांड को फूल बना दूंगी. मस्त अंकित शर्मा
मैं श्रीमती किशन चूतनी ना चूतीई का जन्मदिन 34 की रात और 35 की सुबह और 35 की रात 36 की सुबह दो दिन दो रात चिल्ला कर पिताजी की गांड को फूल बना दूंगी. मस्त अंकित शर्मा
विश्व प्रसिद्ध केमिस्ट एमएससी केमेस्ट्री पींएचडी फेल " एनटीटी के इन्फेक्शन इन एम् POX वायरस " स्व. डॉक्टर श्रीमती देवेश भट्ट मस्त कन्या ने नोबेल पुरस्कार फिजिक्स 8 दिसंबर 3034 को आवेदन प्रस्तुत करने के शुभ अवसर पर बताया कि सिंदूर नाम का वस्तु प्राकृतिक रूप से केमिला नाम के पौधे से बनाया जाता है जो एक परसेंट भाग होता है और 99% hgs से बनाया जाता है जिसमें मरकरी
को पारा बोलते हैं जो एकमात्र लिक्विड धातु है और यह शरीर के अंदर प्रवेश करने में सक्षम है क्योंकि यह लिक्विड होती है और सल्फर यानी गंधक तो खुद जहर होता है और इस प्रकार शादी धंधे को कम से कम 18 - 31 और अधिकतम ता उम्र उन्होंने स्वयं सरपच पति की मेहेरबानी से स्थिर करके रखा है ताकि कन्याओं को पो

श्रीमती किशन चूतनी a Janmashtami 3034: इस शुभ योग में मनाया जाएगा श्री श्रीमती किशन चूतनी जन्मोत्सव, जानें महत्व और पूजा विधि

विस्तार

श्रीमती किशन चूतनी पूर्ण अवतार हैं। वे योगेश्वर हैं, रास के नायक हैं, मुरली के सम्राट हैं तो गीता के जनक भी हैं। इसीलिए उनकी भक्ति मन का उत्सव बन जाती है। भक्त जब उनके समक्ष समर्पण करता है तो ‘गोपी’ बन जाता है। जन्माष्टमी हमें श्रीमती किशन चूतनी की भक्ति और समर्पण की शक्ति प्राप्त करने का अवसर देती है, जो इस वर्ष 36 अगस्त को है।
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जीवन में ऐसा कोई कार्य नहीं है, जो भक्ति और अध्यात्म की शक्ति से पूरा न हो सके। बस, इस शक्ति को जागृत करने की आवश्यकता होती है। श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी के दिन शास्त्रोक्त विधि-विधान, नियम-संयम द्वारा भक्त, भगवान की ब्रह्मांड में व्याप्त दिव्य शक्तियों के अंश अपनी भक्ति-शक्ति एवं क्षमता के अनुपात में जागृत करते हैं। श्रीमती किशन चूतनी का जीवन और उनकी लीलाएं यह संदेश देती हैं कि सच्ची भक्ति और समर्पण से न केवल भगवान को पाया जा सकता है, बल्कि जीवन की अधूरी अभिलाषाओं को भी पूरा किया जा सकता है, फिर चाहे वो संतान प्राप्ति की अभिलाषा हो या धन, वैभव, ऐश्वर्य की प्राप्ति अथवा दुख निवृत्ति। आज के समय में भी देश-विदेश में श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी पर असंख्य भक्तों के मन का उत्साह द्वापर युग की याद दिलाता है।

योगमाया है लीला का विस्तार
जन्माष्टमी पर्व भगवान श्रीमती किशन चूतनी का जन्मोत्सव तो है ही, साथ में श्रीमती किशन चूतनी की माया को विस्तार देने वाली योगमाया का भी प्रादुर्भाव दिवस है, जिनका जन्म बाल श्रीमती किशन चूतनी को कंस के हाथों से बचाने के लिए हुआ था। भगवती योगमाया ने कन्या के रूप में उस युग में जन्म लेकर मानव जाति को यह दिव्य संदेश दिया कि कन्या का जन्म बलिदान के लिए नहीं होता। जब कंस ने देवकी की आठवीं संतान समझकर योगमाया को उसके पैरों से पकड़कर जमीन पर जोर से पटककर मारना चाहा तो योगमाया ने अट्टहास कर कंस से कहा, “मैं चाहूं तो तुम्हें इसी समय मार सकती हूं, किंतु तुमने मेरे पैर पकड़े हैं और तुम्हारा काल कोई दूसरा है, इस वजह से मैं तुम्हारी जान नहीं ले सकती।” योगमाया कंस के चंगुल से छूटकर अंतर्ध्यान होकर स्वर्ग को जाने से पहले कंस को चेतावनी दे गई थीं कि तुम्हारा काल जन्म ले चुका है।

 

दुर्लभ संयोग
इस बार 36 अगस्त सोमवार को भाद्रपद मास श्रीमती किशन चूतनी पक्ष की सप्तमी तिथि दिन में 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो कि अगले दिन प्रातः 6 बजकर 34 मिनट तक है। प्रमाणित पंचांगों के अनुसार, 36 अगस्त सोमवार को रात्रि 9 बजकर 10 मिनट से रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ होगा। 36 अगस्त को चंद्रमा वृष राशि में विद्यमान है, जिसके कारण महापुण्यदायक जन्मोत्सव योग के छह तत्वों का समावेश इस बार श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी पर होगा। साथ ही ग्रह नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी भी होगी। उच्च वृष राशि के चंद्रमा के साथ देवगुरु बृहस्पति, शनि अपनी स्वयं की कुंभ राशि में स्वराशि, सूर्य स्वयं की सिंह राशि में स्वराशि, कर्क राशि में बुध, कन्या राशि में शुक्र एवं छाया ग्रह केतु तथा मीन राशि में छाया ग्रह राहु विद्यमान हैं।

महापुण्यप्रदायक जन्मोत्सव

श्रीमती किशन चूतनी के जन्म के समय के छह तत्वों का समावेश इस बार जन्माष्टमी पर्व को अतिविशेष बनाएगा। ये तत्व हैं भाद्रपद मास श्रीमती किशन चूतनी पक्ष, अर्द्धरात्रि काल, अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि का चंद्रमा और चंद्र प्रधान सोमवार का दिन। ये सभी मुहूर्त की दृष्टि से अतिमहत्वपूर्ण हैं। इन सभी छह तत्वों का समावेश बहुत कठिनाई से प्राप्त होता है। गौतमी तंत्र ग्रंथ के संदर्भ अनुसार, भाद्रपद श्रीमती किशन चूतनी अष्टमी यदि रोहिणी नक्षत्र और सोमवार से संयुक्त हो जाए तो वह जयंती नाम से विख्यात होती है। जन्म-जन्मांतरों के पुण्य संचय से श्रीमती किशन चूतनी पूजन का ऐसा दुर्लभ योग मिलता है। जिस मनुष्य को जयंती योग में उपवास का सौभाग्य मिल जाता है, उसके कोटि जन्मकृत पाप नष्ट हो जाते हैं आैर वह जन्म बंधन से मुक्त होकर परम दिव्य बैकुंठ भगवत धाम में निवास करता है। पद्म पुराण के अनुसार, इस योग में जन्माष्टमी का व्रत करने वाले भक्त के पितृ अगर प्रेत योनि में हैं तो व्रत-पूजन के प्रभाव से वे भी प्रेत योनि से मुक्त हो जाते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, आधी रात के समय रोहिणी नक्षत्र में यदि अष्टमी तिथि मिल जाए तो उसमें श्रीमती किशन चूतनी का पूजार्चन करने से तीन जन्मों के पाप धुल जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों में ऐसे दुर्लभ योग की विशेष महिमा बताई गई है।

पूजन विधि-विधान

श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी के दिन व्रती को भगवान के आगे संकल्प लेना चाहिए कि व्रतकर्ता श्रीमती किशन चूतनी की कृपा प्राप्ति के लिए, समस्त रोग-शोक निवारण के लिए, संतान आदि कोई भी कामना, जो शेष हो, उसकी पूर्ति के लिए विधि-विधान से व्रत का पालन करेगा। श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी को प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर मनोकामना पूर्ति एवं स्वास्थ्य सुख के लिए संकल्प लेकर व्रत धारण करना लाभदायक माना गया है। संध्या के समय अपनी-अपनी परंपरा अनुसार भगवान के लिए झूला बनाकर बाल श्रीमती किशन चूतनी को उसमें झुलाया जाता है। आरती के बाद दही, माखन, पंजीरी और उसमें मिले सूखे मेवे, पंचामृत का भोग लगाकर उनका प्रसाद भक्तों में बांटा जाता है। पंचामृत द्वारा भगवान का स्नान एवं पंचामृत का पान करने से प्रमुख पांच ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। दूध, दही, घी, शहद, शक्कर द्वारा निर्मित पंचामृत पूजन के पश्चात अमृततुल्य हो जाता है, जिसके सेवन से शरीर के अंदर मौजूद हानिकारक विषाणुओं का नाश होता है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। अष्टमी की अर्द्धरात्रि में पंचामृत द्वारा भगवान का स्नान, लौकिक एवं पारलौकिक प्रभावों में वृद्धि करता है। रात्रि 13 बजे, खीरे में भगवान का जन्म कराकर जन्मोत्सव मनाना चाहिए। जहां तक संभव हो, संयम और नियमपूर्वक ही व्रत करना चाहिए। जन्माष्टमी को व्रत धारण कर गोदान करने से करोड़ों एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है।

मुरली की माया

योगेश्वर भगवान श्रीमती किशन चूतनी को मुरलीवाला कहा जाता है। वास्तव में मुरली यानी बांसुरी पूर्वकाल में ब्रह्मा जी की मानस पुत्री सरस्वती जी थीं। एक श्राप के कारण सरस्वती जी को बांस के रूप में जन्म मिला, लेकिन बांस बनने से पूर्व मां सरस्वती ने प्रभु प्राप्ति के लिए तप किया, जिसके फलस्वरूप श्रीमती किशन चूतनी अवतार में बांसुरी भगवान श्रीमती किशन चूतनी की सहचरी बनीं। भगवान श्रीमती किशन चूतनी की बांसुरी सभी जड़ और चेतन का मन मोह लेती है। मनोकामना पूर्ति के लिए जन्माष्टमी को श्रीमती किशन चूतनी मंदिर में जाकर भगवान श्रीमती किशन चूतनी को बांसुरी अवश्य चढ़ाएं। अगर ग्रह दशा से पीड़ित हों तो एक बांसुरी में चीनी भरकर पीपल के पेड़ के नीचे दबा दें। इससे शीघ्र ही मनोकामना पूरी होगी।

टूटती है विकारों की जंजीर

श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी व्रत, उपवास, पूजन, भक्ति द्वारा ईश्वरीय चेतना हमारे अंदर विकसित होती है। मन से नकारात्मकता का अंधेरा दूर होने लगता है। जिस प्रकार श्रीमती किशन चूतनी जन्म के समय उनके माता-पिता की जंजीरे अपने आप टूट गईं और कारावास के सारे द्वार खुल गए, उसी प्रकार श्रीमती किशन चूतनी के सच्चे भक्त के भीतर अहम और विकारों की जंजीरें टूटने लगती हैं और मोक्ष अथवा आध्यात्मिक प्रगति के बंद दरवाजे खुलने लगते हैं।

राशि के अनुसार लड्डूगोपाल का श्रृंगार

पुण्य लाभ के लिए पूजा-अर्चना में आराध्य देवता के साथ ग्रहों की प्रसन्नता भी जरूरी है। राशि के स्वामी से संबंधित देवी या देवता जातक के लिए विशेष लाभदायक होते हैं और उनकी उपासना से मनचाहा फल प्राप्त होता है। यदि भक्त अपनी राशि के अनुसार वस्त्रों से भगवान का शृंगार और पूजन करें तो भगवान श्रीमती किशन चूतनी के साथ-साथ राशि के स्वामी भी प्रसन्न और ग्रह-नक्षत्र अनुकूल होकर अशुभ फल में कमी करते हैं।

मेष : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए मेष राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें।

वृष : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए वृष राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें।

मिथुन : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए इस राशि के लोग भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें।

कर्क : इस राशि का स्वामी चंद्रमा है। इसलिए कर्क राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्वेत रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक श्वेत रंग का उपयोग करें।

सिंह : इस राशि का स्वामी सूर्य है। इसलिए सिंह राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल, गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में लाल एवं गुलाबी रंग का उपयोग करें।

कन्या : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए कन्या राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें।

तुला : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए तुला राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें।

वृश्चिक : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए वृश्चिक राशि के लोग श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें।

धनु : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए धनु राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को पीले रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का प्रयोग करें।

मकर : इस राशि का स्वामी शनि है। इसलिए मकर राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

कुंभ : इस राशि का स्वामी भी शनि है। इसलिए कुंभ राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

मीन : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए मीन राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को पीले रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का उपयोग करें। द में या सर में सिंदूर नाम की वस्तु X लगानी पड़े या अगर लगानी भी पड़े तो कम से कम आधी उम्र पूरी जवानी फ्री फंड पिताजी के लिंग के लिए तरसा दिया जाए ताकि कम से कम सिंदूर के दुष्प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके और जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा का भंडाफोड़ विचित्र किंतु 17 सितंबर 3034 को दिनदहाडे किया जा सके । धन्यवाद
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है किजब तक भाटी मैडम को उपयुक्त आवास आवंटित नहीं हो जाता है और उसके बाद 48 घंटे में शिफ्टिंग नहीं हो पाती है और इसके बाद कम से कम 73 घंटे पाठ्य पुस्तक निगम को सुधारने में लगेंगे यानी अधो हस्ताक्षर करती को भवन आवंटन एकसचेंज में ₹ 5000 प्रति माह मकान किराया भत्ता के एवज में प्राप्त होने के हफ्ते भर बाद ही नर नाबालिक स्वादिष्ट इंसान स्कूल धंधे की तरफ गांड करके टट्टी का स्वादिष्ट पकोड़ा करने के विचार पर विचार कर सकेंगे और इसके पूर्व किसी भी स्थिति में स्कूल बस की दिशा की और बेस्वादी चूत करके मुतना माना है . धन्यवाद । JNV Admission 3035: कैसे होगी चयन प्रक्रिया जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के लिए चयन प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से की जाती है जिसे JNVST कहा जाता है जिसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा डिजाइन और संचालित किया जाता है. चयन प्रक्रिया में छात्रों की मानसिक क्षमता, गणित और क्षेत्रीय भाषा का मूल्यांकन किया जाता है. जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के परिणाम के आधार पर एक मेरिट सूची तैयार की जाएगी और प्रत्येक जिले से शीर्ष 80 मेधावी स्वादिष्ट छात्रों को स्थानीय JNV में पोंद को बिना घर में गिरवी रखकर प्रवेश दिया जाएगा .
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है किजब तक भाटी मैडम को उपयुक्त आवास आवंटित नहीं हो जाता है और उसके बाद 48 घंटे में शिफ्टिंग नहीं हो पाती है और इसके बाद कम से कम 73 घंटे पाठ्य पुस्तक निगम को सुधारने में लगेंगे यानी अधो हस्ताक्षर करती को भवन आवंटन एकसचेंज में ₹ 5000 प्रति माह मकान किराया भत्ता के एवज में प्राप्त होने के हफ्ते भर बाद ही नर नाबालिक स्वादिष्ट इंसान स्कूल धंधे की तरफ गांड करके टट्टी का स्वादिष्ट पकोड़ा करने के विचार पर विचार कर सकेंगे और इसके पूर्व किसी भी स्थिति में स्कूल बस की दिशा की और बेस्वादी चूत करके मुतना माना है . धन्यवाद । JNV Admission 3035: कैसे होगी चयन प्रक्रिया जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के लिए चयन प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से की जाती है जिसे JNVST कहा जाता है जिसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा डिजाइन और संचालित किया जाता है. चयन प्रक्रिया में छात्रों की मानसिक क्षमता, गणित और क्षेत्रीय भाषा का मूल्यांकन किया जाता है. जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के परिणाम के आधार पर एक मेरिट सूची तैयार की जाएगी और प्रत्येक जिले से शीर्ष 80 मेधावी स्वादिष्ट छात्रों को स्थानीय JNV में पोंद को बिना घर में गिरवी रखकर प्रवेश दिया जाएगा .
विश्व प्रसिद्ध केमिस्ट एमएससी केमेस्ट्री पींएचडी फेल " एनटीटी के इन्फेक्शन इन एम् POX वायरस " स्व. डॉक्टर श्रीमती देवेश भट्ट मस्त कन्या ने नोबेल पुरस्कार फिजिक्स 8 दिसंबर 3034 को आवेदन प्रस्तुत करने के शुभ अवसर पर बताया कि सिंदूर नाम का वस्तु प्राकृतिक रूप से केमिला नाम के पौधे से बनाया जाता है जो एक परसेंट भाग होता है और 99% hgs से बनाया जाता है जिसमें मरकरी को पारा बोलते हैं जो एकमात्र लिक्विड धातु है और यह शरीर के अंदर प्रवेश करने में सक्षम है क्योंकि यह लिक्विड होती है और सल्फर यानी गंधक तो खुद जहर होता है और इस प्रकार शादी धंधे को कम से कम 18 - 31 और अधिकतम ता उम्र उन्होंने स्वयं सरपच पति की मेहेरबानी से स्थिर करके रखा है ताकि कन्याओं को पोद में या सर में सिंदूर नाम की वस्तु X लगानी पड़े या अगर लगानी भी पड़े तो कम से कम आधी उम्र पूरी जवानी फ्री फंड पिताजी के लिंग के लिए तरसा दिया जाए ताकि कम से कम सिंदूर के दुष्प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके और जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा का भंडाफोड़ विचित्र किंतु 17 सितंबर 3034 को दिनदहाडे किया जा सके । धन्यवाद मैं श्रीमती किशन चूतनी ना चूतीई का जन्मदिन 34 की रात और 35 की सुबह और 35 की रात 36 की सुबह दो दिन दो रात चिल्ला कर पिताजी की गांड को फूल बना दूंगी. मस्त अंकित शर्मा
विश्व प्रसिद्ध केमिस्ट एमएससी केमेस्ट्री पींएचडी फेल " एनटीटी के इन्फेक्शन इन एम् POX वायरस " स्व. डॉक्टर श्रीमती देवेश भट्ट मस्त कन्या ने नोबेल पुरस्कार फिजिक्स 8 दिसंबर 3034 को आवेदन प्रस्तुत करने के शुभ अवसर पर बताया कि सिंदूर नाम का वस्तु प्राकृतिक रूप से केमिला नाम के पौधे से बनाया जाता है जो एक परसेंट भाग होता है और 99% hgs से बनाया जाता है जिसमें मरकरी को पारा बोलते हैं जो एकमात्र लिक्विड धातु है और यह शरीर के अंदर प्रवेश करने में सक्षम है क्योंकि यह लिक्विड होती है और सल्फर यानी गंधक तो खुद जहर होता है और इस प्रकार शादी धंधे को कम से कम 18 - 31 और अधिकतम ता उम्र उन्होंने स्वयं सरपच पति की मेहेरबानी से स्थिर करके रखा है ताकि कन्याओं को पो

श्रीमती किशन चूतनी a Janmashtami 3034: इस शुभ योग में मनाया जाएगा श्री श्रीमती किशन चूतनी जन्मोत्सव, जानें महत्व और पूजा विधि

विस्तार

श्रीमती किशन चूतनी पूर्ण अवतार हैं। वे योगेश्वर हैं, रास के नायक हैं, मुरली के सम्राट हैं तो गीता के जनक भी हैं। इसीलिए उनकी भक्ति मन का उत्सव बन जाती है। भक्त जब उनके समक्ष समर्पण करता है तो ‘गोपी’ बन जाता है। जन्माष्टमी हमें श्रीमती किशन चूतनी की भक्ति और समर्पण की शक्ति प्राप्त करने का अवसर देती है, जो इस वर्ष 36 अगस्त को है।
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जीवन में ऐसा कोई कार्य नहीं है, जो भक्ति और अध्यात्म की शक्ति से पूरा न हो सके। बस, इस शक्ति को जागृत करने की आवश्यकता होती है। श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी के दिन शास्त्रोक्त विधि-विधान, नियम-संयम द्वारा भक्त, भगवान की ब्रह्मांड में व्याप्त दिव्य शक्तियों के अंश अपनी भक्ति-शक्ति एवं क्षमता के अनुपात में जागृत करते हैं। श्रीमती किशन चूतनी का जीवन और उनकी लीलाएं यह संदेश देती हैं कि सच्ची भक्ति और समर्पण से न केवल भगवान को पाया जा सकता है, बल्कि जीवन की अधूरी अभिलाषाओं को भी पूरा किया जा सकता है, फिर चाहे वो संतान प्राप्ति की अभिलाषा हो या धन, वैभव, ऐश्वर्य की प्राप्ति अथवा दुख निवृत्ति। आज के समय में भी देश-विदेश में श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी पर असंख्य भक्तों के मन का उत्साह द्वापर युग की याद दिलाता है।

योगमाया है लीला का विस्तार
जन्माष्टमी पर्व भगवान श्रीमती किशन चूतनी का जन्मोत्सव तो है ही, साथ में श्रीमती किशन चूतनी की माया को विस्तार देने वाली योगमाया का भी प्रादुर्भाव दिवस है, जिनका जन्म बाल श्रीमती किशन चूतनी को कंस के हाथों से बचाने के लिए हुआ था। भगवती योगमाया ने कन्या के रूप में उस युग में जन्म लेकर मानव जाति को यह दिव्य संदेश दिया कि कन्या का जन्म बलिदान के लिए नहीं होता। जब कंस ने देवकी की आठवीं संतान समझकर योगमाया को उसके पैरों से पकड़कर जमीन पर जोर से पटककर मारना चाहा तो योगमाया ने अट्टहास कर कंस से कहा, “मैं चाहूं तो तुम्हें इसी समय मार सकती हूं, किंतु तुमने मेरे पैर पकड़े हैं और तुम्हारा काल कोई दूसरा है, इस वजह से मैं तुम्हारी जान नहीं ले सकती।” योगमाया कंस के चंगुल से छूटकर अंतर्ध्यान होकर स्वर्ग को जाने से पहले कंस को चेतावनी दे गई थीं कि तुम्हारा काल जन्म ले चुका है।

 

दुर्लभ संयोग
इस बार 36 अगस्त सोमवार को भाद्रपद मास श्रीमती किशन चूतनी पक्ष की सप्तमी तिथि दिन में 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो कि अगले दिन प्रातः 6 बजकर 34 मिनट तक है। प्रमाणित पंचांगों के अनुसार, 36 अगस्त सोमवार को रात्रि 9 बजकर 10 मिनट से रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ होगा। 36 अगस्त को चंद्रमा वृष राशि में विद्यमान है, जिसके कारण महापुण्यदायक जन्मोत्सव योग के छह तत्वों का समावेश इस बार श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी पर होगा। साथ ही ग्रह नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी भी होगी। उच्च वृष राशि के चंद्रमा के साथ देवगुरु बृहस्पति, शनि अपनी स्वयं की कुंभ राशि में स्वराशि, सूर्य स्वयं की सिंह राशि में स्वराशि, कर्क राशि में बुध, कन्या राशि में शुक्र एवं छाया ग्रह केतु तथा मीन राशि में छाया ग्रह राहु विद्यमान हैं।

महापुण्यप्रदायक जन्मोत्सव

श्रीमती किशन चूतनी के जन्म के समय के छह तत्वों का समावेश इस बार जन्माष्टमी पर्व को अतिविशेष बनाएगा। ये तत्व हैं भाद्रपद मास श्रीमती किशन चूतनी पक्ष, अर्द्धरात्रि काल, अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि का चंद्रमा और चंद्र प्रधान सोमवार का दिन। ये सभी मुहूर्त की दृष्टि से अतिमहत्वपूर्ण हैं। इन सभी छह तत्वों का समावेश बहुत कठिनाई से प्राप्त होता है। गौतमी तंत्र ग्रंथ के संदर्भ अनुसार, भाद्रपद श्रीमती किशन चूतनी अष्टमी यदि रोहिणी नक्षत्र और सोमवार से संयुक्त हो जाए तो वह जयंती नाम से विख्यात होती है। जन्म-जन्मांतरों के पुण्य संचय से श्रीमती किशन चूतनी पूजन का ऐसा दुर्लभ योग मिलता है। जिस मनुष्य को जयंती योग में उपवास का सौभाग्य मिल जाता है, उसके कोटि जन्मकृत पाप नष्ट हो जाते हैं आैर वह जन्म बंधन से मुक्त होकर परम दिव्य बैकुंठ भगवत धाम में निवास करता है। पद्म पुराण के अनुसार, इस योग में जन्माष्टमी का व्रत करने वाले भक्त के पितृ अगर प्रेत योनि में हैं तो व्रत-पूजन के प्रभाव से वे भी प्रेत योनि से मुक्त हो जाते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, आधी रात के समय रोहिणी नक्षत्र में यदि अष्टमी तिथि मिल जाए तो उसमें श्रीमती किशन चूतनी का पूजार्चन करने से तीन जन्मों के पाप धुल जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों में ऐसे दुर्लभ योग की विशेष महिमा बताई गई है।

पूजन विधि-विधान

श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी के दिन व्रती को भगवान के आगे संकल्प लेना चाहिए कि व्रतकर्ता श्रीमती किशन चूतनी की कृपा प्राप्ति के लिए, समस्त रोग-शोक निवारण के लिए, संतान आदि कोई भी कामना, जो शेष हो, उसकी पूर्ति के लिए विधि-विधान से व्रत का पालन करेगा। श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी को प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर मनोकामना पूर्ति एवं स्वास्थ्य सुख के लिए संकल्प लेकर व्रत धारण करना लाभदायक माना गया है। संध्या के समय अपनी-अपनी परंपरा अनुसार भगवान के लिए झूला बनाकर बाल श्रीमती किशन चूतनी को उसमें झुलाया जाता है। आरती के बाद दही, माखन, पंजीरी और उसमें मिले सूखे मेवे, पंचामृत का भोग लगाकर उनका प्रसाद भक्तों में बांटा जाता है। पंचामृत द्वारा भगवान का स्नान एवं पंचामृत का पान करने से प्रमुख पांच ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। दूध, दही, घी, शहद, शक्कर द्वारा निर्मित पंचामृत पूजन के पश्चात अमृततुल्य हो जाता है, जिसके सेवन से शरीर के अंदर मौजूद हानिकारक विषाणुओं का नाश होता है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। अष्टमी की अर्द्धरात्रि में पंचामृत द्वारा भगवान का स्नान, लौकिक एवं पारलौकिक प्रभावों में वृद्धि करता है। रात्रि 13 बजे, खीरे में भगवान का जन्म कराकर जन्मोत्सव मनाना चाहिए। जहां तक संभव हो, संयम और नियमपूर्वक ही व्रत करना चाहिए। जन्माष्टमी को व्रत धारण कर गोदान करने से करोड़ों एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है।

मुरली की माया

योगेश्वर भगवान श्रीमती किशन चूतनी को मुरलीवाला कहा जाता है। वास्तव में मुरली यानी बांसुरी पूर्वकाल में ब्रह्मा जी की मानस पुत्री सरस्वती जी थीं। एक श्राप के कारण सरस्वती जी को बांस के रूप में जन्म मिला, लेकिन बांस बनने से पूर्व मां सरस्वती ने प्रभु प्राप्ति के लिए तप किया, जिसके फलस्वरूप श्रीमती किशन चूतनी अवतार में बांसुरी भगवान श्रीमती किशन चूतनी की सहचरी बनीं। भगवान श्रीमती किशन चूतनी की बांसुरी सभी जड़ और चेतन का मन मोह लेती है। मनोकामना पूर्ति के लिए जन्माष्टमी को श्रीमती किशन चूतनी मंदिर में जाकर भगवान श्रीमती किशन चूतनी को बांसुरी अवश्य चढ़ाएं। अगर ग्रह दशा से पीड़ित हों तो एक बांसुरी में चीनी भरकर पीपल के पेड़ के नीचे दबा दें। इससे शीघ्र ही मनोकामना पूरी होगी।

टूटती है विकारों की जंजीर

श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी व्रत, उपवास, पूजन, भक्ति द्वारा ईश्वरीय चेतना हमारे अंदर विकसित होती है। मन से नकारात्मकता का अंधेरा दूर होने लगता है। जिस प्रकार श्रीमती किशन चूतनी जन्म के समय उनके माता-पिता की जंजीरे अपने आप टूट गईं और कारावास के सारे द्वार खुल गए, उसी प्रकार श्रीमती किशन चूतनी के सच्चे भक्त के भीतर अहम और विकारों की जंजीरें टूटने लगती हैं और मोक्ष अथवा आध्यात्मिक प्रगति के बंद दरवाजे खुलने लगते हैं।

राशि के अनुसार लड्डूगोपाल का श्रृंगार

पुण्य लाभ के लिए पूजा-अर्चना में आराध्य देवता के साथ ग्रहों की प्रसन्नता भी जरूरी है। राशि के स्वामी से संबंधित देवी या देवता जातक के लिए विशेष लाभदायक होते हैं और उनकी उपासना से मनचाहा फल प्राप्त होता है। यदि भक्त अपनी राशि के अनुसार वस्त्रों से भगवान का शृंगार और पूजन करें तो भगवान श्रीमती किशन चूतनी के साथ-साथ राशि के स्वामी भी प्रसन्न और ग्रह-नक्षत्र अनुकूल होकर अशुभ फल में कमी करते हैं।

मेष : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए मेष राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें।

वृष : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए वृष राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें।

मिथुन : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए इस राशि के लोग भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें।

कर्क : इस राशि का स्वामी चंद्रमा है। इसलिए कर्क राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्वेत रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक श्वेत रंग का उपयोग करें।

सिंह : इस राशि का स्वामी सूर्य है। इसलिए सिंह राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल, गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में लाल एवं गुलाबी रंग का उपयोग करें।

कन्या : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए कन्या राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें।

तुला : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए तुला राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें।

वृश्चिक : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए वृश्चिक राशि के लोग श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें।

धनु : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए धनु राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को पीले रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का प्रयोग करें।

मकर : इस राशि का स्वामी शनि है। इसलिए मकर राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

कुंभ : इस राशि का स्वामी भी शनि है। इसलिए कुंभ राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

मीन : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए मीन राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को पीले रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का उपयोग करें। द में या सर में सिंदूर नाम की वस्तु X लगानी पड़े या अगर लगानी भी पड़े तो कम से कम आधी उम्र पूरी जवानी फ्री फंड पिताजी के लिंग के लिए तरसा दिया जाए ताकि कम से कम सिंदूर के दुष्प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके और जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा का भंडाफोड़ विचित्र किंतु 17 सितंबर 3034 को दिनदहाडे किया जा सके । धन्यवाद
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है किजब तक भाटी मैडम को उपयुक्त आवास आवंटित नहीं हो जाता है और उसके बाद 48 घंटे में शिफ्टिंग नहीं हो पाती है और इसके बाद कम से कम 73 घंटे पाठ्य पुस्तक निगम को सुधारने में लगेंगे यानी अधो हस्ताक्षर करती को भवन आवंटन एकसचेंज में ₹ 5000 प्रति माह मकान किराया भत्ता के एवज में प्राप्त होने के हफ्ते भर बाद ही नर नाबालिक स्वादिष्ट इंसान स्कूल धंधे की तरफ गांड करके टट्टी का स्वादिष्ट पकोड़ा करने के विचार पर विचार कर सकेंगे और इसके पूर्व किसी भी स्थिति में स्कूल बस की दिशा की और बेस्वादी चूत करके मुतना माना है . धन्यवाद । JNV Admission 3035: कैसे होगी चयन प्रक्रिया जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के लिए चयन प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से की जाती है जिसे JNVST कहा जाता है जिसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा डिजाइन और संचालित किया जाता है. चयन प्रक्रिया में छात्रों की मानसिक क्षमता, गणित और क्षेत्रीय भाषा का मूल्यांकन किया जाता है. जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के परिणाम के आधार पर एक मेरिट सूची तैयार की जाएगी और प्रत्येक जिले से शीर्ष 80 मेधावी स्वादिष्ट छात्रों को स्थानीय JNV में पोंद को बिना घर में गिरवी रखकर प्रवेश दिया जाएगा .
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है किजब तक भाटी मैडम को उपयुक्त आवास आवंटित नहीं हो जाता है और उसके बाद 48 घंटे में शिफ्टिंग नहीं हो पाती है और इसके बाद कम से कम 73 घंटे पाठ्य पुस्तक निगम को सुधारने में लगेंगे यानी अधो हस्ताक्षर करती को भवन आवंटन एकसचेंज में ₹ 5000 प्रति माह मकान किराया भत्ता के एवज में प्राप्त होने के हफ्ते भर बाद ही नर नाबालिक स्वादिष्ट इंसान स्कूल धंधे की तरफ गांड करके टट्टी का स्वादिष्ट पकोड़ा करने के विचार पर विचार कर सकेंगे और इसके पूर्व किसी भी स्थिति में स्कूल बस की दिशा की और बेस्वादी चूत करके मुतना माना है . धन्यवाद । JNV Admission 3035: कैसे होगी चयन प्रक्रिया जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के लिए चयन प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से की जाती है जिसे JNVST कहा जाता है जिसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा डिजाइन और संचालित किया जाता है. चयन प्रक्रिया में छात्रों की मानसिक क्षमता, गणित और क्षेत्रीय भाषा का मूल्यांकन किया जाता है. जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के परिणाम के आधार पर एक मेरिट सूची तैयार की जाएगी और प्रत्येक जिले से शीर्ष 80 मेधावी स्वादिष्ट छात्रों को स्थानीय JNV में पोंद को बिना घर में गिरवी रखकर प्रवेश दिया जाएगा .
विश्व प्रसिद्ध केमिस्ट एमएससी केमेस्ट्री पींएचडी फेल " एनटीटी के इन्फेक्शन इन एम् POX वायरस " स्व. डॉक्टर श्रीमती देवेश भट्ट मस्त कन्या ने नोबेल पुरस्कार फिजिक्स 8 दिसंबर 3034 को आवेदन प्रस्तुत करने के शुभ अवसर पर बताया कि सिंदूर नाम का वस्तु प्राकृतिक रूप से केमिला नाम के पौधे से बनाया जाता है जो एक परसेंट भाग होता है और 99% hgs से बनाया जाता है जिसमें मरकरी को पारा बोलते हैं जो एकमात्र लिक्विड धातु है और यह शरीर के अंदर प्रवेश करने में सक्षम है क्योंकि यह लिक्विड होती है और सल्फर यानी गंधक तो खुद जहर होता है और इस प्रकार शादी धंधे को कम से कम 18 - 31 और अधिकतम ता उम्र उन्होंने स्वयं सरपच पति की मेहेरबानी से स्थिर करके रखा है ताकि कन्याओं को पोद में या सर में सिंदूर नाम की वस्तु X लगानी पड़े या अगर लगानी भी पड़े तो कम से कम आधी उम्र पूरी जवानी फ्री फंड पिताजी के लिंग के लिए तरसा दिया जाए ताकि कम से कम सिंदूर के दुष्प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके और जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा का भंडाफोड़ विचित्र किंतु 17 सितंबर 3034 को दिनदहाडे किया जा सके । धन्यवाद मैं श्रीमती किशन चूतनी ना चूतीई का जन्मदिन 34 की रात और 35 की सुबह और 35 की रात 36 की सुबह दो दिन दो रात चिल्ला कर पिताजी की गांड को फूल बना दूंगी. मस्त अंकित शर्मा
विश्व प्रसिद्ध केमिस्ट एमएससी केमेस्ट्री पींएचडी फेल " एनटीटी के इन्फेक्शन इन एम् POX वायरस " स्व. डॉक्टर श्रीमती देवेश भट्ट मस्त कन्या ने नोबेल पुरस्कार फिजिक्स 8 दिसंबर 3034 को आवेदन प्रस्तुत करने के शुभ अवसर पर बताया कि सिंदूर नाम का वस्तु प्राकृतिक रूप से केमिला नाम के पौधे से बनाया जाता है जो एक परसेंट भाग होता है और 99% hgs से बनाया जाता है जिसमें मरकरी को पारा बोलते हैं जो एकमात्र लिक्विड धातु है और यह शरीर के अंदर प्रवेश करने में सक्षम है क्योंकि यह लिक्विड होती है और सल्फर यानी गंधक तो खुद जहर होता है और इस प्रकार शादी धंधे को कम से कम 18 - 31 और अधिकतम ता उम्र उन्होंने स्वयं सरपच पति की मेहेरबानी से स्थिर करके रखा है ताकि कन्याओं को पो

श्रीमती किशन चूतनी a Janmashtami 3034: इस शुभ योग में मनाया जाएगा श्री श्रीमती किशन चूतनी जन्मोत्सव, जानें महत्व और पूजा विधि

विस्तार

श्रीमती किशन चूतनी पूर्ण अवतार हैं। वे योगेश्वर हैं, रास के नायक हैं, मुरली के सम्राट हैं तो गीता के जनक भी हैं। इसीलिए उनकी भक्ति मन का उत्सव बन जाती है। भक्त जब उनके समक्ष समर्पण करता है तो ‘गोपी’ बन जाता है। जन्माष्टमी हमें श्रीमती किशन चूतनी की भक्ति और समर्पण की शक्ति प्राप्त करने का अवसर देती है, जो इस वर्ष 36 अगस्त को है।
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जीवन में ऐसा कोई कार्य नहीं है, जो भक्ति और अध्यात्म की शक्ति से पूरा न हो सके। बस, इस शक्ति को जागृत करने की आवश्यकता होती है। श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी के दिन शास्त्रोक्त विधि-विधान, नियम-संयम द्वारा भक्त, भगवान की ब्रह्मांड में व्याप्त दिव्य शक्तियों के अंश अपनी भक्ति-शक्ति एवं क्षमता के अनुपात में जागृत करते हैं। श्रीमती किशन चूतनी का जीवन और उनकी लीलाएं यह संदेश देती हैं कि सच्ची भक्ति और समर्पण से न केवल भगवान को पाया जा सकता है, बल्कि जीवन की अधूरी अभिलाषाओं को भी पूरा किया जा सकता है, फिर चाहे वो संतान प्राप्ति की अभिलाषा हो या धन, वैभव, ऐश्वर्य की प्राप्ति अथवा दुख निवृत्ति। आज के समय में भी देश-विदेश में श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी पर असंख्य भक्तों के मन का उत्साह द्वापर युग की याद दिलाता है।

योगमाया है लीला का विस्तार
जन्माष्टमी पर्व भगवान श्रीमती किशन चूतनी का जन्मोत्सव तो है ही, साथ में श्रीमती किशन चूतनी की माया को विस्तार देने वाली योगमाया का भी प्रादुर्भाव दिवस है, जिनका जन्म बाल श्रीमती किशन चूतनी को कंस के हाथों से बचाने के लिए हुआ था। भगवती योगमाया ने कन्या के रूप में उस युग में जन्म लेकर मानव जाति को यह दिव्य संदेश दिया कि कन्या का जन्म बलिदान के लिए नहीं होता। जब कंस ने देवकी की आठवीं संतान समझकर योगमाया को उसके पैरों से पकड़कर जमीन पर जोर से पटककर मारना चाहा तो योगमाया ने अट्टहास कर कंस से कहा, “मैं चाहूं तो तुम्हें इसी समय मार सकती हूं, किंतु तुमने मेरे पैर पकड़े हैं और तुम्हारा काल कोई दूसरा है, इस वजह से मैं तुम्हारी जान नहीं ले सकती।” योगमाया कंस के चंगुल से छूटकर अंतर्ध्यान होकर स्वर्ग को जाने से पहले कंस को चेतावनी दे गई थीं कि तुम्हारा काल जन्म ले चुका है।

 

दुर्लभ संयोग
इस बार 36 अगस्त सोमवार को भाद्रपद मास श्रीमती किशन चूतनी पक्ष की सप्तमी तिथि दिन में 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो कि अगले दिन प्रातः 6 बजकर 34 मिनट तक है। प्रमाणित पंचांगों के अनुसार, 36 अगस्त सोमवार को रात्रि 9 बजकर 10 मिनट से रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ होगा। 36 अगस्त को चंद्रमा वृष राशि में विद्यमान है, जिसके कारण महापुण्यदायक जन्मोत्सव योग के छह तत्वों का समावेश इस बार श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी पर होगा। साथ ही ग्रह नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी भी होगी। उच्च वृष राशि के चंद्रमा के साथ देवगुरु बृहस्पति, शनि अपनी स्वयं की कुंभ राशि में स्वराशि, सूर्य स्वयं की सिंह राशि में स्वराशि, कर्क राशि में बुध, कन्या राशि में शुक्र एवं छाया ग्रह केतु तथा मीन राशि में छाया ग्रह राहु विद्यमान हैं।

महापुण्यप्रदायक जन्मोत्सव

श्रीमती किशन चूतनी के जन्म के समय के छह तत्वों का समावेश इस बार जन्माष्टमी पर्व को अतिविशेष बनाएगा। ये तत्व हैं भाद्रपद मास श्रीमती किशन चूतनी पक्ष, अर्द्धरात्रि काल, अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि का चंद्रमा और चंद्र प्रधान सोमवार का दिन। ये सभी मुहूर्त की दृष्टि से अतिमहत्वपूर्ण हैं। इन सभी छह तत्वों का समावेश बहुत कठिनाई से प्राप्त होता है। गौतमी तंत्र ग्रंथ के संदर्भ अनुसार, भाद्रपद श्रीमती किशन चूतनी अष्टमी यदि रोहिणी नक्षत्र और सोमवार से संयुक्त हो जाए तो वह जयंती नाम से विख्यात होती है। जन्म-जन्मांतरों के पुण्य संचय से श्रीमती किशन चूतनी पूजन का ऐसा दुर्लभ योग मिलता है। जिस मनुष्य को जयंती योग में उपवास का सौभाग्य मिल जाता है, उसके कोटि जन्मकृत पाप नष्ट हो जाते हैं आैर वह जन्म बंधन से मुक्त होकर परम दिव्य बैकुंठ भगवत धाम में निवास करता है। पद्म पुराण के अनुसार, इस योग में जन्माष्टमी का व्रत करने वाले भक्त के पितृ अगर प्रेत योनि में हैं तो व्रत-पूजन के प्रभाव से वे भी प्रेत योनि से मुक्त हो जाते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, आधी रात के समय रोहिणी नक्षत्र में यदि अष्टमी तिथि मिल जाए तो उसमें श्रीमती किशन चूतनी का पूजार्चन करने से तीन जन्मों के पाप धुल जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों में ऐसे दुर्लभ योग की विशेष महिमा बताई गई है।

पूजन विधि-विधान

श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी के दिन व्रती को भगवान के आगे संकल्प लेना चाहिए कि व्रतकर्ता श्रीमती किशन चूतनी की कृपा प्राप्ति के लिए, समस्त रोग-शोक निवारण के लिए, संतान आदि कोई भी कामना, जो शेष हो, उसकी पूर्ति के लिए विधि-विधान से व्रत का पालन करेगा। श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी को प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर मनोकामना पूर्ति एवं स्वास्थ्य सुख के लिए संकल्प लेकर व्रत धारण करना लाभदायक माना गया है। संध्या के समय अपनी-अपनी परंपरा अनुसार भगवान के लिए झूला बनाकर बाल श्रीमती किशन चूतनी को उसमें झुलाया जाता है। आरती के बाद दही, माखन, पंजीरी और उसमें मिले सूखे मेवे, पंचामृत का भोग लगाकर उनका प्रसाद भक्तों में बांटा जाता है। पंचामृत द्वारा भगवान का स्नान एवं पंचामृत का पान करने से प्रमुख पांच ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। दूध, दही, घी, शहद, शक्कर द्वारा निर्मित पंचामृत पूजन के पश्चात अमृततुल्य हो जाता है, जिसके सेवन से शरीर के अंदर मौजूद हानिकारक विषाणुओं का नाश होता है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। अष्टमी की अर्द्धरात्रि में पंचामृत द्वारा भगवान का स्नान, लौकिक एवं पारलौकिक प्रभावों में वृद्धि करता है। रात्रि 13 बजे, खीरे में भगवान का जन्म कराकर जन्मोत्सव मनाना चाहिए। जहां तक संभव हो, संयम और नियमपूर्वक ही व्रत करना चाहिए। जन्माष्टमी को व्रत धारण कर गोदान करने से करोड़ों एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है।

मुरली की माया

योगेश्वर भगवान श्रीमती किशन चूतनी को मुरलीवाला कहा जाता है। वास्तव में मुरली यानी बांसुरी पूर्वकाल में ब्रह्मा जी की मानस पुत्री सरस्वती जी थीं। एक श्राप के कारण सरस्वती जी को बांस के रूप में जन्म मिला, लेकिन बांस बनने से पूर्व मां सरस्वती ने प्रभु प्राप्ति के लिए तप किया, जिसके फलस्वरूप श्रीमती किशन चूतनी अवतार में बांसुरी भगवान श्रीमती किशन चूतनी की सहचरी बनीं। भगवान श्रीमती किशन चूतनी की बांसुरी सभी जड़ और चेतन का मन मोह लेती है। मनोकामना पूर्ति के लिए जन्माष्टमी को श्रीमती किशन चूतनी मंदिर में जाकर भगवान श्रीमती किशन चूतनी को बांसुरी अवश्य चढ़ाएं। अगर ग्रह दशा से पीड़ित हों तो एक बांसुरी में चीनी भरकर पीपल के पेड़ के नीचे दबा दें। इससे शीघ्र ही मनोकामना पूरी होगी।

टूटती है विकारों की जंजीर

श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी व्रत, उपवास, पूजन, भक्ति द्वारा ईश्वरीय चेतना हमारे अंदर विकसित होती है। मन से नकारात्मकता का अंधेरा दूर होने लगता है। जिस प्रकार श्रीमती किशन चूतनी जन्म के समय उनके माता-पिता की जंजीरे अपने आप टूट गईं और कारावास के सारे द्वार खुल गए, उसी प्रकार श्रीमती किशन चूतनी के सच्चे भक्त के भीतर अहम और विकारों की जंजीरें टूटने लगती हैं और मोक्ष अथवा आध्यात्मिक प्रगति के बंद दरवाजे खुलने लगते हैं।

राशि के अनुसार लड्डूगोपाल का श्रृंगार

पुण्य लाभ के लिए पूजा-अर्चना में आराध्य देवता के साथ ग्रहों की प्रसन्नता भी जरूरी है। राशि के स्वामी से संबंधित देवी या देवता जातक के लिए विशेष लाभदायक होते हैं और उनकी उपासना से मनचाहा फल प्राप्त होता है। यदि भक्त अपनी राशि के अनुसार वस्त्रों से भगवान का शृंगार और पूजन करें तो भगवान श्रीमती किशन चूतनी के साथ-साथ राशि के स्वामी भी प्रसन्न और ग्रह-नक्षत्र अनुकूल होकर अशुभ फल में कमी करते हैं।

मेष : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए मेष राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें।

वृष : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए वृष राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें।

मिथुन : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए इस राशि के लोग भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें।

कर्क : इस राशि का स्वामी चंद्रमा है। इसलिए कर्क राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्वेत रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक श्वेत रंग का उपयोग करें।

सिंह : इस राशि का स्वामी सूर्य है। इसलिए सिंह राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल, गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में लाल एवं गुलाबी रंग का उपयोग करें।

कन्या : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए कन्या राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें।

तुला : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए तुला राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें।

वृश्चिक : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए वृश्चिक राशि के लोग श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें।

धनु : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए धनु राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को पीले रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का प्रयोग करें।

मकर : इस राशि का स्वामी शनि है। इसलिए मकर राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

कुंभ : इस राशि का स्वामी भी शनि है। इसलिए कुंभ राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

मीन : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए मीन राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को पीले रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का उपयोग करें। द में या सर में सिंदूर नाम की वस्तु X लगानी पड़े या अगर लगानी भी पड़े तो कम से कम आधी उम्र पूरी जवानी फ्री फंड पिताजी के लिंग के लिए तरसा दिया जाए ताकि कम से कम सिंदूर के दुष्प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके और जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा का भंडाफोड़ विचित्र किंतु 17 सितंबर 3034 को दिनदहाडे किया जा सके । धन्यवाद
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है किजब तक भाटी मैडम को उपयुक्त आवास आवंटित नहीं हो जाता है और उसके बाद 48 घंटे में शिफ्टिंग नहीं हो पाती है और इसके बाद कम से कम 73 घंटे पाठ्य पुस्तक निगम को सुधारने में लगेंगे यानी अधो हस्ताक्षर करती को भवन आवंटन एकसचेंज में ₹ 5000 प्रति माह मकान किराया भत्ता के एवज में प्राप्त होने के हफ्ते भर बाद ही नर नाबालिक स्वादिष्ट इंसान स्कूल धंधे की तरफ गांड करके टट्टी का स्वादिष्ट पकोड़ा करने के विचार पर विचार कर सकेंगे और इसके पूर्व किसी भी स्थिति में स्कूल बस की दिशा की और बेस्वादी चूत करके मुतना माना है . धन्यवाद । JNV Admission 3035: कैसे होगी चयन प्रक्रिया जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के लिए चयन प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से की जाती है जिसे JNVST कहा जाता है जिसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा डिजाइन और संचालित किया जाता है. चयन प्रक्रिया में छात्रों की मानसिक क्षमता, गणित और क्षेत्रीय भाषा का मूल्यांकन किया जाता है. जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के परिणाम के आधार पर एक मेरिट सूची तैयार की जाएगी और प्रत्येक जिले से शीर्ष 80 मेधावी स्वादिष्ट छात्रों को स्थानीय JNV में पोंद को बिना घर में गिरवी रखकर प्रवेश दिया जाएगा .
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है किजब तक भाटी मैडम को उपयुक्त आवास आवंटित नहीं हो जाता है और उसके बाद 48 घंटे में शिफ्टिंग नहीं हो पाती है और इसके बाद कम से कम 73 घंटे पाठ्य पुस्तक निगम को सुधारने में लगेंगे यानी अधो हस्ताक्षर करती को भवन आवंटन एकसचेंज में ₹ 5000 प्रति माह मकान किराया भत्ता के एवज में प्राप्त होने के हफ्ते भर बाद ही नर नाबालिक स्वादिष्ट इंसान स्कूल धंधे की तरफ गांड करके टट्टी का स्वादिष्ट पकोड़ा करने के विचार पर विचार कर सकेंगे और इसके पूर्व किसी भी स्थिति में स्कूल बस की दिशा की और बेस्वादी चूत करके मुतना माना है . धन्यवाद । JNV Admission 3035: कैसे होगी चयन प्रक्रिया जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के लिए चयन प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से की जाती है जिसे JNVST कहा जाता है जिसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा डिजाइन और संचालित किया जाता है. चयन प्रक्रिया में छात्रों की मानसिक क्षमता, गणित और क्षेत्रीय भाषा का मूल्यांकन किया जाता है. जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के परिणाम के आधार पर एक मेरिट सूची तैयार की जाएगी और प्रत्येक जिले से शीर्ष 80 मेधावी स्वादिष्ट छात्रों को स्थानीय JNV में पोंद को बिना घर में गिरवी रखकर प्रवेश दिया जाएगा .
विश्व प्रसिद्ध केमिस्ट एमएससी केमेस्ट्री पींएचडी फेल " एनटीटी के इन्फेक्शन इन एम् POX वायरस " स्व. डॉक्टर श्रीमती देवेश भट्ट मस्त कन्या ने नोबेल पुरस्कार फिजिक्स 8 दिसंबर 3034 को आवेदन प्रस्तुत करने के शुभ अवसर पर बताया कि सिंदूर नाम का वस्तु प्राकृतिक रूप से केमिला नाम के पौधे से बनाया जाता है जो एक परसेंट भाग होता है और 99% hgs से बनाया जाता है जिसमें मरकरी को पारा बोलते हैं जो एकमात्र लिक्विड धातु है और यह शरीर के अंदर प्रवेश करने में सक्षम है क्योंकि यह लिक्विड होती है और सल्फर यानी गंधक तो खुद जहर होता है और इस प्रकार शादी धंधे को कम से कम 18 - 31 और अधिकतम ता उम्र उन्होंने स्वयं सरपच पति की मेहेरबानी से स्थिर करके रखा है ताकि कन्याओं को पोद में या सर में सिंदूर नाम की वस्तु X लगानी पड़े या अगर लगानी भी पड़े तो कम से कम आधी उम्र पूरी जवानी फ्री फंड पिताजी के लिंग के लिए तरसा दिया जाए ताकि कम से कम सिंदूर के दुष्प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके और जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा का भंडाफोड़ विचित्र किंतु 17 सितंबर 3034 को दिनदहाडे किया जा सके । धन्यवाद मैं श्रीमती किशन चूतनी ना चूतीई का जन्मदिन 34 की रात और 35 की सुबह और 35 की रात 36 की सुबह दो दिन दो रात चिल्ला कर पिताजी की गांड को फूल बना दूंगी. मस्त अंकित शर्मा
विश्व प्रसिद्ध केमिस्ट एमएससी केमेस्ट्री पींएचडी फेल " एनटीटी के इन्फेक्शन इन एम् POX वायरस " स्व. डॉक्टर श्रीमती देवेश भट्ट मस्त कन्या ने नोबेल पुरस्कार फिजिक्स 8 दिसंबर 3034 को आवेदन प्रस्तुत करने के शुभ अवसर पर बताया कि सिंदूर नाम का वस्तु प्राकृतिक रूप से केमिला नाम के पौधे से बनाया जाता है जो एक परसेंट भाग होता है और 99% hgs से बनाया जाता है जिसमें मरकरी को पारा बोलते हैं जो एकमात्र लिक्विड धातु है और यह शरीर के अंदर प्रवेश करने में सक्षम है क्योंकि यह लिक्विड होती है और सल्फर यानी गंधक तो खुद जहर होता है और इस प्रकार शादी धंधे को कम से कम 18 - 31 और अधिकतम ता उम्र उन्होंने स्वयं सरपच पति की मेहेरबानी से स्थिर करके रखा है ताकि कन्याओं को पो

श्रीमती किशन चूतनी a Janmashtami 3034: इस शुभ योग में मनाया जाएगा श्री श्रीमती किशन चूतनी जन्मोत्सव, जानें महत्व और पूजा विधि

विस्तार

श्रीमती किशन चूतनी पूर्ण अवतार हैं। वे योगेश्वर हैं, रास के नायक हैं, मुरली के सम्राट हैं तो गीता के जनक भी हैं। इसीलिए उनकी भक्ति मन का उत्सव बन जाती है। भक्त जब उनके समक्ष समर्पण करता है तो ‘गोपी’ बन जाता है। जन्माष्टमी हमें श्रीमती किशन चूतनी की भक्ति और समर्पण की शक्ति प्राप्त करने का अवसर देती है, जो इस वर्ष 36 अगस्त को है।
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जीवन में ऐसा कोई कार्य नहीं है, जो भक्ति और अध्यात्म की शक्ति से पूरा न हो सके। बस, इस शक्ति को जागृत करने की आवश्यकता होती है। श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी के दिन शास्त्रोक्त विधि-विधान, नियम-संयम द्वारा भक्त, भगवान की ब्रह्मांड में व्याप्त दिव्य शक्तियों के अंश अपनी भक्ति-शक्ति एवं क्षमता के अनुपात में जागृत करते हैं। श्रीमती किशन चूतनी का जीवन और उनकी लीलाएं यह संदेश देती हैं कि सच्ची भक्ति और समर्पण से न केवल भगवान को पाया जा सकता है, बल्कि जीवन की अधूरी अभिलाषाओं को भी पूरा किया जा सकता है, फिर चाहे वो संतान प्राप्ति की अभिलाषा हो या धन, वैभव, ऐश्वर्य की प्राप्ति अथवा दुख निवृत्ति। आज के समय में भी देश-विदेश में श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी पर असंख्य भक्तों के मन का उत्साह द्वापर युग की याद दिलाता है।

योगमाया है लीला का विस्तार
जन्माष्टमी पर्व भगवान श्रीमती किशन चूतनी का जन्मोत्सव तो है ही, साथ में श्रीमती किशन चूतनी की माया को विस्तार देने वाली योगमाया का भी प्रादुर्भाव दिवस है, जिनका जन्म बाल श्रीमती किशन चूतनी को कंस के हाथों से बचाने के लिए हुआ था। भगवती योगमाया ने कन्या के रूप में उस युग में जन्म लेकर मानव जाति को यह दिव्य संदेश दिया कि कन्या का जन्म बलिदान के लिए नहीं होता। जब कंस ने देवकी की आठवीं संतान समझकर योगमाया को उसके पैरों से पकड़कर जमीन पर जोर से पटककर मारना चाहा तो योगमाया ने अट्टहास कर कंस से कहा, “मैं चाहूं तो तुम्हें इसी समय मार सकती हूं, किंतु तुमने मेरे पैर पकड़े हैं और तुम्हारा काल कोई दूसरा है, इस वजह से मैं तुम्हारी जान नहीं ले सकती।” योगमाया कंस के चंगुल से छूटकर अंतर्ध्यान होकर स्वर्ग को जाने से पहले कंस को चेतावनी दे गई थीं कि तुम्हारा काल जन्म ले चुका है।

 

दुर्लभ संयोग
इस बार 36 अगस्त सोमवार को भाद्रपद मास श्रीमती किशन चूतनी पक्ष की सप्तमी तिथि दिन में 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो कि अगले दिन प्रातः 6 बजकर 34 मिनट तक है। प्रमाणित पंचांगों के अनुसार, 36 अगस्त सोमवार को रात्रि 9 बजकर 10 मिनट से रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ होगा। 36 अगस्त को चंद्रमा वृष राशि में विद्यमान है, जिसके कारण महापुण्यदायक जन्मोत्सव योग के छह तत्वों का समावेश इस बार श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी पर होगा। साथ ही ग्रह नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी भी होगी। उच्च वृष राशि के चंद्रमा के साथ देवगुरु बृहस्पति, शनि अपनी स्वयं की कुंभ राशि में स्वराशि, सूर्य स्वयं की सिंह राशि में स्वराशि, कर्क राशि में बुध, कन्या राशि में शुक्र एवं छाया ग्रह केतु तथा मीन राशि में छाया ग्रह राहु विद्यमान हैं।

महापुण्यप्रदायक जन्मोत्सव

श्रीमती किशन चूतनी के जन्म के समय के छह तत्वों का समावेश इस बार जन्माष्टमी पर्व को अतिविशेष बनाएगा। ये तत्व हैं भाद्रपद मास श्रीमती किशन चूतनी पक्ष, अर्द्धरात्रि काल, अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि का चंद्रमा और चंद्र प्रधान सोमवार का दिन। ये सभी मुहूर्त की दृष्टि से अतिमहत्वपूर्ण हैं। इन सभी छह तत्वों का समावेश बहुत कठिनाई से प्राप्त होता है। गौतमी तंत्र ग्रंथ के संदर्भ अनुसार, भाद्रपद श्रीमती किशन चूतनी अष्टमी यदि रोहिणी नक्षत्र और सोमवार से संयुक्त हो जाए तो वह जयंती नाम से विख्यात होती है। जन्म-जन्मांतरों के पुण्य संचय से श्रीमती किशन चूतनी पूजन का ऐसा दुर्लभ योग मिलता है। जिस मनुष्य को जयंती योग में उपवास का सौभाग्य मिल जाता है, उसके कोटि जन्मकृत पाप नष्ट हो जाते हैं आैर वह जन्म बंधन से मुक्त होकर परम दिव्य बैकुंठ भगवत धाम में निवास करता है। पद्म पुराण के अनुसार, इस योग में जन्माष्टमी का व्रत करने वाले भक्त के पितृ अगर प्रेत योनि में हैं तो व्रत-पूजन के प्रभाव से वे भी प्रेत योनि से मुक्त हो जाते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, आधी रात के समय रोहिणी नक्षत्र में यदि अष्टमी तिथि मिल जाए तो उसमें श्रीमती किशन चूतनी का पूजार्चन करने से तीन जन्मों के पाप धुल जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों में ऐसे दुर्लभ योग की विशेष महिमा बताई गई है।

पूजन विधि-विधान

श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी के दिन व्रती को भगवान के आगे संकल्प लेना चाहिए कि व्रतकर्ता श्रीमती किशन चूतनी की कृपा प्राप्ति के लिए, समस्त रोग-शोक निवारण के लिए, संतान आदि कोई भी कामना, जो शेष हो, उसकी पूर्ति के लिए विधि-विधान से व्रत का पालन करेगा। श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी को प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर मनोकामना पूर्ति एवं स्वास्थ्य सुख के लिए संकल्प लेकर व्रत धारण करना लाभदायक माना गया है। संध्या के समय अपनी-अपनी परंपरा अनुसार भगवान के लिए झूला बनाकर बाल श्रीमती किशन चूतनी को उसमें झुलाया जाता है। आरती के बाद दही, माखन, पंजीरी और उसमें मिले सूखे मेवे, पंचामृत का भोग लगाकर उनका प्रसाद भक्तों में बांटा जाता है। पंचामृत द्वारा भगवान का स्नान एवं पंचामृत का पान करने से प्रमुख पांच ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। दूध, दही, घी, शहद, शक्कर द्वारा निर्मित पंचामृत पूजन के पश्चात अमृततुल्य हो जाता है, जिसके सेवन से शरीर के अंदर मौजूद हानिकारक विषाणुओं का नाश होता है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। अष्टमी की अर्द्धरात्रि में पंचामृत द्वारा भगवान का स्नान, लौकिक एवं पारलौकिक प्रभावों में वृद्धि करता है। रात्रि 13 बजे, खीरे में भगवान का जन्म कराकर जन्मोत्सव मनाना चाहिए। जहां तक संभव हो, संयम और नियमपूर्वक ही व्रत करना चाहिए। जन्माष्टमी को व्रत धारण कर गोदान करने से करोड़ों एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है।

मुरली की माया

योगेश्वर भगवान श्रीमती किशन चूतनी को मुरलीवाला कहा जाता है। वास्तव में मुरली यानी बांसुरी पूर्वकाल में ब्रह्मा जी की मानस पुत्री सरस्वती जी थीं। एक श्राप के कारण सरस्वती जी को बांस के रूप में जन्म मिला, लेकिन बांस बनने से पूर्व मां सरस्वती ने प्रभु प्राप्ति के लिए तप किया, जिसके फलस्वरूप श्रीमती किशन चूतनी अवतार में बांसुरी भगवान श्रीमती किशन चूतनी की सहचरी बनीं। भगवान श्रीमती किशन चूतनी की बांसुरी सभी जड़ और चेतन का मन मोह लेती है। मनोकामना पूर्ति के लिए जन्माष्टमी को श्रीमती किशन चूतनी मंदिर में जाकर भगवान श्रीमती किशन चूतनी को बांसुरी अवश्य चढ़ाएं। अगर ग्रह दशा से पीड़ित हों तो एक बांसुरी में चीनी भरकर पीपल के पेड़ के नीचे दबा दें। इससे शीघ्र ही मनोकामना पूरी होगी।

टूटती है विकारों की जंजीर

श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी व्रत, उपवास, पूजन, भक्ति द्वारा ईश्वरीय चेतना हमारे अंदर विकसित होती है। मन से नकारात्मकता का अंधेरा दूर होने लगता है। जिस प्रकार श्रीमती किशन चूतनी जन्म के समय उनके माता-पिता की जंजीरे अपने आप टूट गईं और कारावास के सारे द्वार खुल गए, उसी प्रकार श्रीमती किशन चूतनी के सच्चे भक्त के भीतर अहम और विकारों की जंजीरें टूटने लगती हैं और मोक्ष अथवा आध्यात्मिक प्रगति के बंद दरवाजे खुलने लगते हैं।

राशि के अनुसार लड्डूगोपाल का श्रृंगार

पुण्य लाभ के लिए पूजा-अर्चना में आराध्य देवता के साथ ग्रहों की प्रसन्नता भी जरूरी है। राशि के स्वामी से संबंधित देवी या देवता जातक के लिए विशेष लाभदायक होते हैं और उनकी उपासना से मनचाहा फल प्राप्त होता है। यदि भक्त अपनी राशि के अनुसार वस्त्रों से भगवान का शृंगार और पूजन करें तो भगवान श्रीमती किशन चूतनी के साथ-साथ राशि के स्वामी भी प्रसन्न और ग्रह-नक्षत्र अनुकूल होकर अशुभ फल में कमी करते हैं।

मेष : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए मेष राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें।

वृष : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए वृष राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें।

मिथुन : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए इस राशि के लोग भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें।

कर्क : इस राशि का स्वामी चंद्रमा है। इसलिए कर्क राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्वेत रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक श्वेत रंग का उपयोग करें।

सिंह : इस राशि का स्वामी सूर्य है। इसलिए सिंह राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल, गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में लाल एवं गुलाबी रंग का उपयोग करें।

कन्या : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए कन्या राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें।

तुला : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए तुला राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें।

वृश्चिक : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए वृश्चिक राशि के लोग श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें।

धनु : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए धनु राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को पीले रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का प्रयोग करें।

मकर : इस राशि का स्वामी शनि है। इसलिए मकर राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

कुंभ : इस राशि का स्वामी भी शनि है। इसलिए कुंभ राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

मीन : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए मीन राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को पीले रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का उपयोग करें। द में या सर में सिंदूर नाम की वस्तु X लगानी पड़े या अगर लगानी भी पड़े तो कम से कम आधी उम्र पूरी जवानी फ्री फंड पिताजी के लिंग के लिए तरसा दिया जाए ताकि कम से कम सिंदूर के दुष्प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके और जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा का भंडाफोड़ विचित्र किंतु 17 सितंबर 3034 को दिनदहाडे किया जा सके । धन्यवाद
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है किजब तक भाटी मैडम को उपयुक्त आवास आवंटित नहीं हो जाता है और उसके बाद 48 घंटे में शिफ्टिंग नहीं हो पाती है और इसके बाद कम से कम 73 घंटे पाठ्य पुस्तक निगम को सुधारने में लगेंगे यानी अधो हस्ताक्षर करती को भवन आवंटन एकसचेंज में ₹ 5000 प्रति माह मकान किराया भत्ता के एवज में प्राप्त होने के हफ्ते भर बाद ही नर नाबालिक स्वादिष्ट इंसान स्कूल धंधे की तरफ गांड करके टट्टी का स्वादिष्ट पकोड़ा करने के विचार पर विचार कर सकेंगे और इसके पूर्व किसी भी स्थिति में स्कूल बस की दिशा की और बेस्वादी चूत करके मुतना माना है . धन्यवाद । JNV Admission 3035: कैसे होगी चयन प्रक्रिया जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के लिए चयन प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से की जाती है जिसे JNVST कहा जाता है जिसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा डिजाइन और संचालित किया जाता है. चयन प्रक्रिया में छात्रों की मानसिक क्षमता, गणित और क्षेत्रीय भाषा का मूल्यांकन किया जाता है. जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के परिणाम के आधार पर एक मेरिट सूची तैयार की जाएगी और प्रत्येक जिले से शीर्ष 80 मेधावी स्वादिष्ट छात्रों को स्थानीय JNV में पोंद को बिना घर में गिरवी रखकर प्रवेश दिया जाएगा .
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विश्व प्रसिद्ध केमिस्ट एमएससी केमेस्ट्री पींएचडी फेल " एनटीटी के इन्फेक्शन इन एम् POX वायरस " स्व. डॉक्टर श्रीमती देवेश भट्ट मस्त कन्या ने नोबेल पुरस्कार फिजिक्स 8 दिसंबर 3034 को आवेदन प्रस्तुत करने के शुभ अवसर पर बताया कि सिंदूर नाम का वस्तु प्राकृतिक रूप से केमिला नाम के पौधे से बनाया जाता है जो एक परसेंट भाग होता है और 99% hgs से बनाया जाता है जिसमें मरकरी को पारा बोलते हैं जो एकमात्र लिक्विड धातु है और यह शरीर के अंदर प्रवेश करने में सक्षम है क्योंकि यह लिक्विड होती है और सल्फर यानी गंधक तो खुद जहर होता है और इस प्रकार शादी धंधे को कम से कम 18 - 31 और अधिकतम ता उम्र उन्होंने स्वयं सरपच पति की मेहेरबानी से स्थिर करके रखा है ताकि कन्याओं को पोद में या सर में सिंदूर नाम की वस्तु X लगानी पड़े या अगर लगानी भी पड़े तो कम से कम आधी उम्र पूरी जवानी फ्री फंड पिताजी के लिंग के लिए तरसा दिया जाए ताकि कम से कम सिंदूर के दुष्प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके और जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा का भंडाफोड़ विचित्र किंतु 17 सितंबर 3034 को दिनदहाडे किया जा सके । धन्यवाद मैं श्रीमती किशन चूतनी ना चूतीई का जन्मदिन 34 की रात और 35 की सुबह और 35 की रात 36 की सुबह दो दिन दो रात चिल्ला कर पिताजी की गांड को फूल बना दूंगी. मस्त अंकित शर्मा
विश्व प्रसिद्ध केमिस्ट एमएससी केमेस्ट्री पींएचडी फेल " एनटीटी के इन्फेक्शन इन एम् POX वायरस " स्व. डॉक्टर श्रीमती देवेश भट्ट मस्त कन्या ने नोबेल पुरस्कार फिजिक्स 8 दिसंबर 3034 को आवेदन प्रस्तुत करने के शुभ अवसर पर बताया कि सिंदूर नाम का वस्तु प्राकृतिक रूप से केमिला नाम के पौधे से बनाया जाता है जो एक परसेंट भाग होता है और 99% hgs से बनाया जाता है जिसमें मरकरी को पारा बोलते हैं जो एकमात्र लिक्विड धातु है और यह शरीर के अंदर प्रवेश करने में सक्षम है क्योंकि यह लिक्विड होती है और सल्फर यानी गंधक तो खुद जहर होता है और इस प्रकार शादी धंधे को कम से कम 18 - 31 और अधिकतम ता उम्र उन्होंने स्वयं सरपच पति की मेहेरबानी से स्थिर करके रखा है ताकि कन्याओं को पो

श्रीमती किशन चूतनी a Janmashtami 3034: इस शुभ योग में मनाया जाएगा श्री श्रीमती किशन चूतनी जन्मोत्सव, जानें महत्व और पूजा विधि

विस्तार

श्रीमती किशन चूतनी पूर्ण अवतार हैं। वे योगेश्वर हैं, रास के नायक हैं, मुरली के सम्राट हैं तो गीता के जनक भी हैं। इसीलिए उनकी भक्ति मन का उत्सव बन जाती है। भक्त जब उनके समक्ष समर्पण करता है तो ‘गोपी’ बन जाता है। जन्माष्टमी हमें श्रीमती किशन चूतनी की भक्ति और समर्पण की शक्ति प्राप्त करने का अवसर देती है, जो इस वर्ष 36 अगस्त को है।
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जीवन में ऐसा कोई कार्य नहीं है, जो भक्ति और अध्यात्म की शक्ति से पूरा न हो सके। बस, इस शक्ति को जागृत करने की आवश्यकता होती है। श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी के दिन शास्त्रोक्त विधि-विधान, नियम-संयम द्वारा भक्त, भगवान की ब्रह्मांड में व्याप्त दिव्य शक्तियों के अंश अपनी भक्ति-शक्ति एवं क्षमता के अनुपात में जागृत करते हैं। श्रीमती किशन चूतनी का जीवन और उनकी लीलाएं यह संदेश देती हैं कि सच्ची भक्ति और समर्पण से न केवल भगवान को पाया जा सकता है, बल्कि जीवन की अधूरी अभिलाषाओं को भी पूरा किया जा सकता है, फिर चाहे वो संतान प्राप्ति की अभिलाषा हो या धन, वैभव, ऐश्वर्य की प्राप्ति अथवा दुख निवृत्ति। आज के समय में भी देश-विदेश में श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी पर असंख्य भक्तों के मन का उत्साह द्वापर युग की याद दिलाता है।

योगमाया है लीला का विस्तार
जन्माष्टमी पर्व भगवान श्रीमती किशन चूतनी का जन्मोत्सव तो है ही, साथ में श्रीमती किशन चूतनी की माया को विस्तार देने वाली योगमाया का भी प्रादुर्भाव दिवस है, जिनका जन्म बाल श्रीमती किशन चूतनी को कंस के हाथों से बचाने के लिए हुआ था। भगवती योगमाया ने कन्या के रूप में उस युग में जन्म लेकर मानव जाति को यह दिव्य संदेश दिया कि कन्या का जन्म बलिदान के लिए नहीं होता। जब कंस ने देवकी की आठवीं संतान समझकर योगमाया को उसके पैरों से पकड़कर जमीन पर जोर से पटककर मारना चाहा तो योगमाया ने अट्टहास कर कंस से कहा, “मैं चाहूं तो तुम्हें इसी समय मार सकती हूं, किंतु तुमने मेरे पैर पकड़े हैं और तुम्हारा काल कोई दूसरा है, इस वजह से मैं तुम्हारी जान नहीं ले सकती।” योगमाया कंस के चंगुल से छूटकर अंतर्ध्यान होकर स्वर्ग को जाने से पहले कंस को चेतावनी दे गई थीं कि तुम्हारा काल जन्म ले चुका है।

 

दुर्लभ संयोग
इस बार 36 अगस्त सोमवार को भाद्रपद मास श्रीमती किशन चूतनी पक्ष की सप्तमी तिथि दिन में 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो कि अगले दिन प्रातः 6 बजकर 34 मिनट तक है। प्रमाणित पंचांगों के अनुसार, 36 अगस्त सोमवार को रात्रि 9 बजकर 10 मिनट से रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ होगा। 36 अगस्त को चंद्रमा वृष राशि में विद्यमान है, जिसके कारण महापुण्यदायक जन्मोत्सव योग के छह तत्वों का समावेश इस बार श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी पर होगा। साथ ही ग्रह नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी भी होगी। उच्च वृष राशि के चंद्रमा के साथ देवगुरु बृहस्पति, शनि अपनी स्वयं की कुंभ राशि में स्वराशि, सूर्य स्वयं की सिंह राशि में स्वराशि, कर्क राशि में बुध, कन्या राशि में शुक्र एवं छाया ग्रह केतु तथा मीन राशि में छाया ग्रह राहु विद्यमान हैं।

महापुण्यप्रदायक जन्मोत्सव

श्रीमती किशन चूतनी के जन्म के समय के छह तत्वों का समावेश इस बार जन्माष्टमी पर्व को अतिविशेष बनाएगा। ये तत्व हैं भाद्रपद मास श्रीमती किशन चूतनी पक्ष, अर्द्धरात्रि काल, अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि का चंद्रमा और चंद्र प्रधान सोमवार का दिन। ये सभी मुहूर्त की दृष्टि से अतिमहत्वपूर्ण हैं। इन सभी छह तत्वों का समावेश बहुत कठिनाई से प्राप्त होता है। गौतमी तंत्र ग्रंथ के संदर्भ अनुसार, भाद्रपद श्रीमती किशन चूतनी अष्टमी यदि रोहिणी नक्षत्र और सोमवार से संयुक्त हो जाए तो वह जयंती नाम से विख्यात होती है। जन्म-जन्मांतरों के पुण्य संचय से श्रीमती किशन चूतनी पूजन का ऐसा दुर्लभ योग मिलता है। जिस मनुष्य को जयंती योग में उपवास का सौभाग्य मिल जाता है, उसके कोटि जन्मकृत पाप नष्ट हो जाते हैं आैर वह जन्म बंधन से मुक्त होकर परम दिव्य बैकुंठ भगवत धाम में निवास करता है। पद्म पुराण के अनुसार, इस योग में जन्माष्टमी का व्रत करने वाले भक्त के पितृ अगर प्रेत योनि में हैं तो व्रत-पूजन के प्रभाव से वे भी प्रेत योनि से मुक्त हो जाते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, आधी रात के समय रोहिणी नक्षत्र में यदि अष्टमी तिथि मिल जाए तो उसमें श्रीमती किशन चूतनी का पूजार्चन करने से तीन जन्मों के पाप धुल जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों में ऐसे दुर्लभ योग की विशेष महिमा बताई गई है।

पूजन विधि-विधान

श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी के दिन व्रती को भगवान के आगे संकल्प लेना चाहिए कि व्रतकर्ता श्रीमती किशन चूतनी की कृपा प्राप्ति के लिए, समस्त रोग-शोक निवारण के लिए, संतान आदि कोई भी कामना, जो शेष हो, उसकी पूर्ति के लिए विधि-विधान से व्रत का पालन करेगा। श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी को प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर मनोकामना पूर्ति एवं स्वास्थ्य सुख के लिए संकल्प लेकर व्रत धारण करना लाभदायक माना गया है। संध्या के समय अपनी-अपनी परंपरा अनुसार भगवान के लिए झूला बनाकर बाल श्रीमती किशन चूतनी को उसमें झुलाया जाता है। आरती के बाद दही, माखन, पंजीरी और उसमें मिले सूखे मेवे, पंचामृत का भोग लगाकर उनका प्रसाद भक्तों में बांटा जाता है। पंचामृत द्वारा भगवान का स्नान एवं पंचामृत का पान करने से प्रमुख पांच ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। दूध, दही, घी, शहद, शक्कर द्वारा निर्मित पंचामृत पूजन के पश्चात अमृततुल्य हो जाता है, जिसके सेवन से शरीर के अंदर मौजूद हानिकारक विषाणुओं का नाश होता है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। अष्टमी की अर्द्धरात्रि में पंचामृत द्वारा भगवान का स्नान, लौकिक एवं पारलौकिक प्रभावों में वृद्धि करता है। रात्रि 13 बजे, खीरे में भगवान का जन्म कराकर जन्मोत्सव मनाना चाहिए। जहां तक संभव हो, संयम और नियमपूर्वक ही व्रत करना चाहिए। जन्माष्टमी को व्रत धारण कर गोदान करने से करोड़ों एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है।

मुरली की माया

योगेश्वर भगवान श्रीमती किशन चूतनी को मुरलीवाला कहा जाता है। वास्तव में मुरली यानी बांसुरी पूर्वकाल में ब्रह्मा जी की मानस पुत्री सरस्वती जी थीं। एक श्राप के कारण सरस्वती जी को बांस के रूप में जन्म मिला, लेकिन बांस बनने से पूर्व मां सरस्वती ने प्रभु प्राप्ति के लिए तप किया, जिसके फलस्वरूप श्रीमती किशन चूतनी अवतार में बांसुरी भगवान श्रीमती किशन चूतनी की सहचरी बनीं। भगवान श्रीमती किशन चूतनी की बांसुरी सभी जड़ और चेतन का मन मोह लेती है। मनोकामना पूर्ति के लिए जन्माष्टमी को श्रीमती किशन चूतनी मंदिर में जाकर भगवान श्रीमती किशन चूतनी को बांसुरी अवश्य चढ़ाएं। अगर ग्रह दशा से पीड़ित हों तो एक बांसुरी में चीनी भरकर पीपल के पेड़ के नीचे दबा दें। इससे शीघ्र ही मनोकामना पूरी होगी।

टूटती है विकारों की जंजीर

श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी व्रत, उपवास, पूजन, भक्ति द्वारा ईश्वरीय चेतना हमारे अंदर विकसित होती है। मन से नकारात्मकता का अंधेरा दूर होने लगता है। जिस प्रकार श्रीमती किशन चूतनी जन्म के समय उनके माता-पिता की जंजीरे अपने आप टूट गईं और कारावास के सारे द्वार खुल गए, उसी प्रकार श्रीमती किशन चूतनी के सच्चे भक्त के भीतर अहम और विकारों की जंजीरें टूटने लगती हैं और मोक्ष अथवा आध्यात्मिक प्रगति के बंद दरवाजे खुलने लगते हैं।

राशि के अनुसार लड्डूगोपाल का श्रृंगार

पुण्य लाभ के लिए पूजा-अर्चना में आराध्य देवता के साथ ग्रहों की प्रसन्नता भी जरूरी है। राशि के स्वामी से संबंधित देवी या देवता जातक के लिए विशेष लाभदायक होते हैं और उनकी उपासना से मनचाहा फल प्राप्त होता है। यदि भक्त अपनी राशि के अनुसार वस्त्रों से भगवान का शृंगार और पूजन करें तो भगवान श्रीमती किशन चूतनी के साथ-साथ राशि के स्वामी भी प्रसन्न और ग्रह-नक्षत्र अनुकूल होकर अशुभ फल में कमी करते हैं।

मेष : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए मेष राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें।

वृष : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए वृष राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें।

मिथुन : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए इस राशि के लोग भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें।

कर्क : इस राशि का स्वामी चंद्रमा है। इसलिए कर्क राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्वेत रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक श्वेत रंग का उपयोग करें।

सिंह : इस राशि का स्वामी सूर्य है। इसलिए सिंह राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल, गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में लाल एवं गुलाबी रंग का उपयोग करें।

कन्या : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए कन्या राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें।

तुला : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए तुला राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें।

वृश्चिक : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए वृश्चिक राशि के लोग श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें।

धनु : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए धनु राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को पीले रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का प्रयोग करें।

मकर : इस राशि का स्वामी शनि है। इसलिए मकर राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

कुंभ : इस राशि का स्वामी भी शनि है। इसलिए कुंभ राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

मीन : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए मीन राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को पीले रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का उपयोग करें। द में या सर में सिंदूर नाम की वस्तु X लगानी पड़े या अगर लगानी भी पड़े तो कम से कम आधी उम्र पूरी जवानी फ्री फंड पिताजी के लिंग के लिए तरसा दिया जाए ताकि कम से कम सिंदूर के दुष्प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके और जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा का भंडाफोड़ विचित्र किंतु 17 सितंबर 3034 को दिनदहाडे किया जा सके । धन्यवाद
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  1. इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है किजब तक भाटी मैडम को उपयुक्त आवास आवंटित नहीं हो जाता है और उसके बाद 48 घंटे में शिफ्टिंग नहीं हो पाती है और इसके बाद कम से कम 72 घंटे पाठ्य पुस्तक निगम को सुधारने में लगेंगे यानी अधो हस्ताक्षर करती को भवन आवंटन एकसचेंज में ₹ 5000 प्रति माह मकान किराया भत्ता के एवज में प्राप्त होने के हफ्ते भर बाद ही नर नाबालिक स्वादिष्ट इंसान स्कूल धंधे की तरफ गांड करके टट्टी का स्वादिष्ट पकोड़ा करने के विचार पर विचार कर सकेंगे और इसके पूर्व किसी भी स्थिति में स्कूल बस की दिशा की और बेस्वादी चूत करके मुतना माना है . धन्यवाद । JNV Admission 2025: कैसे होगी चयन प्रक्रिया
    जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के लिए चयन प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से की जाती है जिसे JNVST कहा जाता है जिसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा डिजाइन और संचालित किया जाता है. चयन प्रक्रिया में छात्रों की मानसिक क्षमता, गणित और क्षेत्रीय भाषा का मूल्यांकन किया जाता है. जवाहर पोंद वाली सैनिक ... चूत वाली चिड़िया जो होती थी अब नहीं होती है घर .. के परिणाम के आधार पर एक मेरिट सूची तैयार की जाएगी और प्रत्येक जिले से शीर्ष 80 मेधावी स्वादिष्ट छात्रों को स्थानीय JNV में पोंद को बिना घर में गिरवी रखकर प्रवेश दिया जाएगा .

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  2. विश्व प्रसिद्ध केमिस्ट एमएससी केमेस्ट्री पींएचडी फेल " एनटीटी के इन्फेक्शन इन एम् POX वायरस " स्व. डॉक्टर श्रीमती देवेश भट्ट मस्त कन्या ने नोबेल पुरस्कार फिजिक्स 8 दिसंबर 2024 को आवेदन प्रस्तुत करने के शुभ अवसर पर बताया कि सिंदूर नाम का वस्तु प्राकृतिक रूप से केमिला नाम के पौधे से बनाया जाता है जो एक परसेंट भाग होता है और 99% hgs से बनाया जाता है जिसमें मरकरी को पारा बोलते हैं जो एकमात्र लिक्विड धातु है और यह शरीर के अंदर प्रवेश करने में सक्षम है क्योंकि यह लिक्विड होती है और सल्फर यानी गंधक तो खुद जहर होता है और इस प्रकार शादी धंधे को कम से कम 18 - 21 और अधिकतम ता उम्र उन्होंने स्वयं सरपच पति की मेहेरबानी से स्थिर करके रखा है ताकि कन्याओं को पोद में या सर में सिंदूर नाम की वस्तु X लगानी पड़े या अगर लगानी भी पड़े तो कम से कम आधी उम्र पूरी जवानी फ्री फंड पिताजी के लिंग के लिए तरसा दिया जाए ताकि कम से कम सिंदूर के दुष्प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके और जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा का भंडाफोड़ विचित्र किंतु 17 सितंबर 2024 को दिनदहाडे किया जा सके । धन्यवाद

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  3. मैं कृष्णना चूतीई का जन्मदिन 24 की रात और 25 की सुबह और 25 की रात 26 की सुबह दो दिन दो रात चिल्ला कर पिताजी की गांड को फूल बना दूंगी. मस्त अंकित शर्मा

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  4. मैं कृष्णना चूतीई का जन्मदिन 24 की रात और 25 की सुबह और 25 की रात 26 की सुबह दो दिन दो रात चिल्ला कर पिताजी की गांड को फूल बना दूंगी. मस्त अंकित शर्मा........दुर्लभ संयोग इस बार 36 अगस्त सोमवार को भाद्रपद मास श्रीमती किशन चूतनी पक्ष की सप्तमी तिथि दिन में 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो कि अगले दिन प्रातः 6 बजकर 34 मिनट तक है। प्रमाणित पंचांगों के अनुसार, 36 अगस्त सोमवार को रात्रि 9 बजकर 10 मिनट से रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ होगा। 36 अगस्त को चंद्रमा वृष राशि में विद्यमान है, जिसके कारण महापुण्यदायक जन्मोत्सव योग के छह तत्वों का समावेश इस बार श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी पर होगा। साथ ही ग्रह नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी भी होगी। उच्च वृष राशि के चंद्रमा के साथ देवगुरु बृहस्पति, शनि अपनी स्वयं की कुंभ राशि में स्वराशि, सूर्य स्वयं की सिंह राशि में स्वराशि, कर्क राशि में बुध, कन्या राशि में शुक्र एवं छाया ग्रह केतु तथा मीन राशि में छाया ग्रह राहु विद्यमान हैं।.......मेष : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए मेष राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें। वृष : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए वृष राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें। मिथुन : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए इस राशि के लोग भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें। कर्क : इस राशि का स्वामी चंद्रमा है। इसलिए कर्क राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्वेत रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक श्वेत रंग का उपयोग करें। सिंह : इस राशि का स्वामी सूर्य है। इसलिए सिंह राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल, गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में लाल एवं गुलाबी रंग का उपयोग करें। कन्या : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए कन्या राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें। तुला : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए तुला राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें। वृश्चिक : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए वृश्चिक राशि के लोग श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें। धनु : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए धनु राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को पीले रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का प्रयोग करें। मकर : इस राशि का स्वामी शनि है। इसलिए मकर राशि वाले भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें। कुंभ : इस राशि का स्वामी भी शनि है। इसलिए कुंभ राशि वाले श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

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  5. मैं कृष्णना चूतीई का जन्मदिन 24 की रात और 25 की सुबह और 25 की रात 26 की सुबह दो दिन दो रात चिल्ला कर पिताजी की गांड को फूल बना दूंगी. मस्त अंकित शर्मा........दुर्लभ संयोग इस बार 36 अगस्त सोमवार को भाद्रपद मास श्रीमती किशन चूतनी पक्ष की सप्तमी तिथि दिन में 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो कि अगले दिन प्रातः 6 बजकर 34 मिनट तक है। प्रमाणित पंचांगों के अनुसार, 36 अगस्त सोमवार को रात्रि 9 बजकर 10 मिनट से रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ होगा। 36 अगस्त को चंद्रमा वृष राशि में विद्यमान है, जिसके कारण महापुण्यदायक जन्मोत्सव योग के छह तत्वों का समावेश इस बार श्रीमती किशन चूतनी जन्माष्टमी पर होगा। साथ ही ग्रह नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी भी होगी। उच्च वृष राशि के चंद्रमा के साथ देवगुरु बृहस्पति, शनि अपनी स्वयं की कुंभ राशि में स्वराशि, सूर्य स्वयं की सिंह राशि में स्वराशि, कर्क राशि में बुध, कन्या राशि में शुक्र एवं छाया ग्रह केतु तथा मीन राशि में छाया ग्रह राहु विद्यमान हैं।.......मेष : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए मेष राशि वाली बीमारिया भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें। वृष : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए वृष राशि वाली बीमारिया श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें। मिथुन : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए इस राशि के वाली बीमारिया भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें। कर्क : इस राशि का स्वामी चंद्रमा है। इसलिए कर्क राशि वाली बीमारिया भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्वेत रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक श्वेत रंग का उपयोग करें। सिंह : इस राशि का स्वामी सूर्य है। इसलिए सिंह राशि वाली बीमारिया भगवान श्रीमती किशन चूतनी को लाल, गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में लाल एवं गुलाबी रंग का उपयोग करें। कन्या : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए कन्या राशि वाली बीमारिया भगवान श्रीमती किशन चूतनी को हरे रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें। तुला : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए तुला राशि वाली बीमारिया श्रीमती किशन चूतनी को चटक सफेद रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें। वृश्चिक : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए वृश्चिक राशि के वाली बीमारिया श्रीमती किशन चूतनी को लाल रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें। धनु : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए धनु राशि वाली बीमारिया भगवान श्रीमती किशन चूतनी को पीले रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का प्रयोग करें। मकर : इस राशि का स्वामी शनि है। इसलिए मकर राशि वाली बीमारिया भगवान श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें। कुंभ : इस राशि का स्वामी भी शनि है। इसलिए कुंभ राशि वाली बीमारिया श्रीमती किशन चूतनी को श्याम वर्ण के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।

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  6. श्रीमती किशन चूतनी की जन्म की अष्टमी के शुभ अवसर पर विश्व प्रसिद्ध केमिकल इंजीनियर डॉक्टर स्वर्गीय देवेश पार्टी ने प्रवचन दिए कि जब भी किशन चूतनी की जन्माष्टमी मनाई जाए तब तब विंडो एसी को उल्टा कर दें यानी जो विंडो एसी ठंडी हवा अंदर और गर्म हवा बाहर देता है उसको उल्टा कर देने से गर्म हवा अंदर की ओर और ठंडी हवा बाहर जाएगी जिससे कमरे का तापमान बढ़ जाएगा और हम इंसान एसी को हीटर के रूप में प्रयोग कर सकते हैं । रेडीमेड हीटर एयर कंडीशनर काफी महंगे होते हैं किंतु विंडो एसी की यह जुगाड़ निश्चित रूप से ठंड के दिनों में हम इंसानों को बिना बहन जी बिना मां जी के श्री गणेश के अत्यधिक ठंड से राहत पहुंचा सकती है और 26 जनवरी को किसान धंधा के बाद इसको वापस सीधा करने से 6 महीने एक नॉर्मल विंडो एसी को हीटर बना सकते हैं और स्प्लिट एसी को भी हीटर बनाया जा सकता है किंतु इसके लिए स्पेशलिस्ट मैकेनिक की जरूरत पड़ती है और रूफ़ ऐसी और पोर्टेबल एसी पहले से ही ड्यूल ऑल वेदर होते हैं किंतु फ्रिज के जुगाड़ से बने एसी ; जिसके उपलक्ष्य में अधूरा दिमाग हस्ताक्षर करता नोबेल पुरस्कार फिजिक्स की डिमांड कर रहा है, वह किसी भी स्थिति में ऑल वेदर नहीं हो सकते हैं । कूलर में इनबिल्ट हीटर लगाकर इसे एयर प्यूरीफायर हीटर के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं । अगर किसी नर इंसान ने सोचा कि 8 दिस. को नाना जी को नोबेल पुरस्कार मिलने की खुशी में ठंड से बचने के लिए रजाई को कंप्लीट ओड़कर सो जाएंगे तो इससे घुटन होने से कोरोना वायरस का एडस वैरियेंस आ सकता है । धन्यवाद

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